Attitude

प्रवृति  ( Attitude ) :

कोई भी व्यक्ति किसी प्रकार का कार्य करता है तो यह समझा जाता है कि वह जो कार्य कर रहा है उसे मन से कार्य कर रहा है। बात सही भी है बिना मन लगाये कोई कार्य सम्पन्न नहीं हो सकता । यही बात खेल-कूद जैसे कार्यकलाप में भी लागू होता है। बिना तन-मन लगाये कोई भी खेल में खिलाड़ी सफल नहीं हो सकता। खिलाड़ी एक ऐसा शख्शियत होता है जिसका तन और मन  पवित्र होता है। बिना पवित्र मन के, कोई भी खिलाड़ी सिर्फ तन के सहारे खेल की ऊँचाइयों को कभी छू नहीं सकता। लेकिन बहुत बार ऐसा देखा गया है कि खिलाड़ी अस्थिर मन से खेलता है या अपने खेल से टीम को हानि पहुँचाने का कार्य करता है। अर्थात् उसकी प्रवृति ( Attitude ) खेल के प्रति सही नहीं रहता है।

प्रवृति दो तरह की होती है :

  • सकारात्मक प्रवृति
  • नकारात्मक प्रवृति

सकारात्मक प्रवृति ( Positive Attitude ): सकारात्मक प्रवृति की दिशा उन्नति की ओर होती है। प्राय: देखा जाता है कि हर खिलाड़ी स्वयं या टीम के लिए कुछ करना चाहता हैऔर तन-मन लगाकर टीम के लिए अपना योगदान चाहता है। खेल की विधा चाहे शारीरिक हो या मानसिक वह हमेशा सकारात्मक पक्ष के साथ रहता है।

सकारत्मक प्रवृति दो तरह की होती है :

  1. मानसिक प्रवृति : इस तरह की प्रवृति में व्यक्ति का मन हमेशा उन निर्दिष्ट कार्य पर लगा रहता है जो उन्हें सौपा गया है। उसका मन उस कार्य के इर्द-गिर्द ही रहता है और सोच उस कार्य को उत्कृष्ट तरीके से निपटाने पर लगा रहता है।
  2. शारीरिक प्रवृति : इस तरह की प्रवृति में व्यक्ति का तन हमेशा उन निर्दिष्ट कार्य को सम्पन्न करने की तत्परता दिखाती है जो उन्हें सौपा गया है। उनकी शारीरिक क्रियाएँ और हाव-भाव उस कार्य  में लगने वाली क्रियाओं के जैसा ही क्रियाशील रहता है। उसका तन उस अभ्यास में लगा रहता है जिससे कि कार्य को उत्कृष्ट तरीके से निपटाया जा सके।

नकारत्मक प्रवृति (  Negative Attitude ) : नकारत्मक प्रवृति की दिशा अवनति की ओर होती है। नकारत्मक प्रवृति के कई कारण  होते है। शरीरिक अस्वस्थ्यता, मानसिक अस्वस्थ्यता, स्थिति के कारण नाखुशी, प्रतिद्वंद्विता, बदले की भावना इत्यादि प्रमुख कारण नकारात्मक प्रवृति के लिए उत्तरदायी होते हैं।

– इन-फॉर्म खिलाड़ी की प्रवृति हमेशा सकारात्मक होती है। वह चाह कर भी अपनी दिशा को अवनति की ओर नहीं ले जा सकता। इन-फॉर्म खिलाड़ी की सकारात्मकता प्राकृतिक बाध्यता के फलस्वरूप होती है। जिस तरह पूर्ण स्वस्थ्य बीज अपने को अंकुरित होने से रोक नहीं सकता ठीक उसी प्रकार इन-फॉर्म खिलाड़ी स्वयं को अच्छा परफॉरमेंस देने से रोक नहीं सकता।

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