Basic Reformer

बेसिक रिफॉर्मर ( BASIC REFORMER )

भोजन का न पचना : आम तौर पर भोजन के बाद किसी व्यक्ति के पेट का आचरण उसके शारीरिक ताकत और स्वाथ्य के स्तर पर आधारित होता है । शरीर यदि अस्वस्थ्य रहेगा, तो शरीर के आंतरिक अंगों की शक्तियाँ कम होंगी। इन अंगों में यकृत, आमाशय, अग्नाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के पाचक इन्जाइम का स्राव करने वाले अंग शामिल हैं, जिनके सम्मिलित प्रयास से ग्रहण किया हुआ भोजन पचता है। अगर ये सभी अंग या इनमे से कुछ अंग कमजोर होंगे तो ग्रहण किया हुआ भोजन या तो नहीं पचेगा, या तो मुश्किल से पचेगा और यदि पच भी गया तो पचा हुआ भोजन का मल अनियमित होगा । भोजन के अनपच होने की अवस्था में अन्पचा भोजन, साबूत या अर्ध पचा हुआ ही मल के रूप में शरीर से बाहर आता है। अन्पचा भोजन या अर्ध पचा भोजन यदि शरीर से बाहर आता है तो ये तरल अवस्था में ही निकलता है और इसमें तरलता का हिस्सा शरीर के पानी का होता है। इस तरह यदि बार-बार कोई व्यक्ति अनपच का शिकार होगा तो उसके शरीर का पानी भी निष्कासित होते रहेगा। यही स्थिति यदि दैनिक रूप से रहेगा तो व्यक्ति के अन्दर पानी की कमी पैदा होगी और वह कमजोर होगा। इस अवस्था से बचने के लिए ऊपर लिखित अंगों को मजबूत बनाना होगा। भोजन का न पचना कई स्थितियों पर निर्भर करता है, इसमे आंतरिक कमजोरी के अलावा भी समय पर भोजन न करना, भोजन के बाद या पहले अवांछित पदार्थों का सेवन, भोजन के बाद तुरंत स्नान करना, धूप से आने के बाद तुरंत खाना इत्यादि अनपच का अन्य कारण हो सकते है, पर ये स्थायी प्रकार का कारण नहीं है।

इस तरह भोजन के न पचने से :

  • ग्रहण किये भोजन का शोसन न होना।
  • भोजन के पौष्टिक तत्व प्रोटीन, खनिज-लवण का व्यर्थ जाना।
  • शरीर से जल का अतिरिक्त निष्कासन।
  • शरीर के वजन में कमी आना।
  • शारीरिक कमजोरी महसूस करना।
  • मानसिक रूप से कमजोरी महसूस करना, इत्यादि होता है।

भोजन का पचना पर शरीर में पौष्टिक तत्वों का संचय न होना : भोजन अच्छा से पचने का मतलब यह की पाचक तत्र के सभी अंग अपना कार्य कर रहे हैं। यह विश्वास किया जा सकता है कि यकृत, आमाशय, अग्नाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के पाचक इन्जाइम का स्राव करने वाले सभी अंग की स्थिति अच्छी है और इसमें किसी प्रकार की त्रुटि नहीं है।

लेकिन, इन सभी अंगों के सही कार्य करने मात्र से अच्छी सेहत की गारंटी नहीं मिलती । इन सभी अंगों के द्वारा भोजन से शोषित की गयी ऊर्जा यथा प्रोटीन, खनिज- लवण, बिटामिन इत्यादि पोषक तत्व अगर शरीर के अन्दर नहीं रुकता है, तो किये गए भोजन का कोई लाभ नहीं मिलता। इन पोषक तत्वों को शरीर के अन्दर कैसे रोकें यह एक समस्या है। आधुनिक विज्ञान बोलता है, उपर से खनिज-लवण, बिटामिन और प्रोटीन का पाउडर देकर उसकी भरपाई करें, पर ये सही नहीं है। ये वैकल्पिक उपाय अस्थायी और शरीर के लिए हानिकारक होती है। वैकल्पिक उपाय बंद कर देने के बाद शरीर अपने वास्तविक रास्ता में आ जाता है। अथवा, इनके लगातर चालू रखने से मोटापा के रूप में इनके बूरे लक्षण सामने आने लगता है।

हम आपको एक उदहारण से समझाते हैं : मनुष्य का शरीर एक खोखली नाली के समान होता है । इस नाली में हम भोज्य पदार्थ डालते हैं, भोजन शरीर के अन्दर जाता हैं। मनुष्य का पाचन तंत्र नाली के अन्दर जा रहे भोजन को पचाता है और उसमे से ऊर्जा को सोख लेता है। पचे हुए भोजन को मल के रूप में नाली से बाहर निष्कासित कर देता है और ग्रहण किये ऊर्जा को शरीर के अन्दर रोक लेता है। इसी रोके हुए ऊर्जा से मनुष्य के अन्दर खून बनता है जो इसके ताकत का मूल आधार होता है। लेकिन ये खून जो मनुष्य के ताकत का आधार होता है, यह भी किसी ना किसी रूप में, या तो शरीर के अन्दर खप जाता है या फिर अन्य किसी रूप में शरीर से बाहर चला जाता है। यदि, यह ऊर्जा शरीर के अन्दर खप जाता है और मसल बनाने के काम आ जाता है तो यह शरीर के स्वस्थ्य के लिए सही संकेत है। लेकिन, यदि यह शरीर के बाहर व्यर्थ चला जाता है तो स्वाथ्य के लिए चिंताजनक है।

हमारा यह उत्पाद शरीर के इसी चिता को आधार बनाकर अभिकल्पित की गयी है । यह उत्पाद शरीर के ऊर्जा को ना केवल शरीर के अन्दर रोकेगा बल्कि इसे संचित करने में भी मदद करेगा।

भोजन के पचने और शरीर में पौष्टिक तत्वों का संचय होने से :

  • भोजन के पौष्टिक तत्वों का अवशोसन होगा।
  • भोजन के पौष्टिक तत्वों का ऊर्जा में रूपांतरण होगा।
  • शरीर में रक्त की कमी दूर होगी।
  • शरीर में मांस-पेशी का निर्माण होगा।
  • शारीरिक थाकन नहीं होगी।
  • मानसिक संतुष्टि स्वत: उत्पन्न होगी।

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