FAQs

1. स्पोर्ट्स में फार्म क्या होता है ?

खिलाड़ी के अंदर मौजूद हुनर एवं उनकी भुजाओं में अवस्थित ताकत का सर्वश्रेष्ठ समंजन तथा खेलों अथवा शारीरिक व मानसिक प्रतियोगिता में इसका विवेकपूर्ण इस्तेमाल  ही फार्म कहलाता है। इसी समंजन के तहत ही कोई खिलाड़ी अपने अंदर स्थित विशिष्ट हुनर को अपने ताकत  व विवेक के बल पर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में तब्दील करता है।

2. खिलाड़ियों का फॉर्म किन-किन तत्त्वों से बनता है ?

खिलाड़ी जब खेलने लायक होता है, मैदान में खेलने के लिए उतरता है तो यह समझा जाना चाहिए कि वह बीमार नहीं है।  वह कोई न कोई फॉर्म में है जो उनके द्वारा परफॉर्म करने पर ही प्रकट हो सकता है। यहाँ यह स्पष्ट किया जा रहा है कि एक पूर्ण स्वस्थ खिलाड़ी का फॉर्म किन-किन तत्त्वों से बना होता है।

  • भोजन एवं संतुलित आहार ( Food and Diets )
  • तंदुरुस्ती ( Fitness )
  • अभ्यास ( Practice )
  • प्रशिक्षण ( Coaching )
  • भोजन-अनुपूरक एवं दवाइयाँ (  Food supplements and Medicines )
  • प्राकृतिक प्रभाव (  Natural Effects )

भोजन एवं संतुलित आहार ( Food and Diets ) : यह  खिलाड़ियों के फॉर्म को विकसित करने और  बनाये रखने में बहुत बड़ा भूमिका निभाता है। खिलाड़ी का दैनिक भोजन और संतुलित आहार उसके फॉर्म का  40% हिस्से के लिए जिम्मेदार होता है। अगर खिलाड़ी को सही भोजन और संतुलित  आहार  न  मिले तो खिलाड़ी कभी भी अच्छा परफॉरमेंस देने लायक नहीं रह सकता ।  भोजन की गुणवत्ता और आहार का समय-सारणी दैनिक रूप से महत्वपूर्ण होता है। अगर यह सही न हो तो शरीर की अनुकूलता प्रभावित होती है।

तंदुरुस्ती (  Fitness ) : फॉर्म के निर्माण में 15-20 % तक का हिस्सा तंदुरुस्ती का होता है। किसी भी खेल में हिस्सा लेने के लिए पहले शरीर को उस खेल में प्रतिभागी होने लायक बनाना होता है। खिलाड़ी को स्वयं को सही खिलाड़ी बनाने के लिए अपने तन और मन को सामान्य से उच्चतर स्तर तक ले जाना पड़ता है। इसे प्राप्त करने के लिए इन्हें दो स्तर पर काम करना पड़ता है। यथा;

  • शारीरक तंदुरुस्ती ( Physical Fitness ) : सही और संतुलित शारीरिक तंदुरुस्ती प्राप्त करने के लिए खिलाड़ी को उचित खाना के साथ-साथ तदनुरूप उचित व्यायाम के द्वारा अपने शारीरिक तंदुरुस्ती को प्राप्त करना पड़ता है। शारीरिक व्यायाम को दो तरफ़ा समंजित करना पड़ता है, पहला उचित खाना के साथ-साथ व्यायाम की मात्रा को सही रखना और अपने खेल की विधा के अनुसार शरीर के अंगों  को आकर देना तथा निखारना।
  • मानसिक तंदुरुस्ती ( Mental Fitness ) : किसी खेल में अच्छा परफॉरमेंस को प्राप्त करने के लिए एकाग्रता की आवश्यकता होती है। तन में अगर स्वास्थ्य मन न रहे तो मानसिक तनाव के कारण तंत्रिका तंत्र पर बहुत ही विपरीत प्रभाव पड़ता है, यहाँ तक की रक्त प्रवाह की दिशा और गति दोनों बदल जाता है। ये दोनों बदल जाय तो किसी भी अवस्था में अच्छा परफॉरमेंस की कामना करना व्यर्थ है। अत: खिलाड़ी को मानसिक स्वाथ्य बनाये रखे के लिए पूजा-प्रार्थना, दुआ-कामना के साथ-साथ ध्यान तथा योग का अभ्यास करना होता है।

अभ्यास ( Practice ) : किसी भी खेल में  पारंगतता प्राप्त करने के लिए खेल की विधा को जानना और अपने शरीर को उस खेल के अनुरूप क्रियाशील तथा अभ्यस्त बनाने के लिए शतत अभ्यास की जरूरत होती है। खिलाड़ियों को इसके लिए काफी समय तक मैदान में पसीना बहाना पड़ता है। तन और मन दोनों को खेल के अनुरूप ढालना तथा उसको राष्ट्रीय ऊँचाइयों से होते हुए अंतराष्ट्रीय मानक तक पहुँचाने के लिए खेल तथा शरीर के उपर काफी समय और ध्यान देना पड़ता है। एक बड़ा खिलाड़ी को बनाने और उसके फॉर्म को बनाये रखने  में 15-20 %  तक योगदान अभ्यास का होता है।

प्रशिक्षण ( Coaching ) : प्रशिक्षक का कार्य  किसी खिलाड़ी के हुनर को अंतिम रूप देना है। जैसे कोई इमारत सीमेंट, बालू और सरिया के माध्यम से खड़ी की जाती है तो वह मात्र एक ढाँचा होती है। जब तक उस ढाँचे पर प्लास्टर नहीं चढ़ाया जाता और रंग-रोगन नहीं किया जाता इमारत अपनी सम्पूर्णत: को प्राप्त नहीं कर सकता। खिलाड़ियों के मामले में एक प्रशिक्षक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे कर प्लास्टर और रंग-रोगन चढ़ाने के माफिक खिलाड़ी के हुनर पर अंतिम आवरण चढ़ाता है। नई-नई तकनीकों और उपायों पर अभ्यास कराता है जिससे खिलाड़ी विकट परिस्थितियों में भी विचलित न हो तथा कठिन वक्त से उबर सके। खिलाड़ी के परफॉरमेंस पर प्रशिक्षक का 10-15 % प्रभाव रहता है।

भोजन-अनुपूरक एवं दवाइयाँ (  Food supplements and Medicines ) : भोजन-अनुपूरक एवं दवाइयों के माध्यम से खिलाड़ियों के भोजन सम्बन्धी आवश्यकताओं को अंतिम रूप दिया जाता है। खिलाड़ियों को अपना परफॉरमेंस देने में अपना सम्पूर्ण हुनर और ताकत झोंकना पड़ता है। ऐसे में यदि खिलाड़ी के ताकत में किसी तरह की कमी रह जाय तो वह परफॉरमेंस देने में चूक जाता है। ताकत को हमेशा उच्चतर स्थिति में रखने के लिए भोजन-अनुपूरक एवं दवाइयों (  Food supplements and Medicines ) का इस्तेमाल जरुरी होता है और इसका खिलाड़ी के परफॉरमेंस पर 10-15 % असर रहता है। खिलाड़ियों को भोजन-अनुपूरक एवं दवाइयों के इस्तेमाल में सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि यह शारीर पर विपरीत प्रभाव भी डाल सकती है।

प्राकृतिक प्रभाव (  Natural Effects ) : खिलाड़ियों के फॉर्म पर शरीर के अंत: क्रियाओं का प्राकृतिक प्रभाव एक महत्वपूर्ण तत्व है जो खिलाड़ी के परफॉरमेंस को प्रभावित करती है।

3. स्पोर्ट्स में इन फॉर्म और आउट ऑफ़ फॉर्म में क्या अंतर होता है ?

  • इन फॉर्म  : कोई खिलाड़ी जिन अतिविशिष्ट गुणों के कारण उच्च स्तरीय टीम में शामिल होता है उन्हीं गुणों के कारण यदि बार-बार और लगातार अपने ही द्वारा स्थापित उच्चतम प्रतिमानों को बारंबार स्पर्श करता है तो वह “ इन फॉर्म ” की अवस्था में होता है।
  • आउट ऑफ़ फॉर्म : कोई खिलाड़ी जिन अतिविशिष्ट गुणों के कारण उच्च स्तरीय टीम में शामिल होता है यदि वह उन्हीं अतिविशिष्ट गुणों का इस्तेमाल करते हुए भी यदि बार-बार और लगातार अपने ही द्वारा स्थापित उच्चतम प्रतिमानों को स्पर्श नहीं कर पाता है तो वह “आउट ऑफ़ फॉर्म ” की अवस्था में होता है।

4. खिलाड़ियों के फॉर्म को कौन-कौन तत्व प्रभावित करते हैं ?

किसी भी खिलाड़ी के “IN FORM ” में खेलने के लिए उसका आत्मविश्वास उसके साथ होना बहुत जरुरी है। OUT OF FORM के कारक तत्व खिलाड़ियों के आत्मविश्वास के स्तर को उन्नति और अवनति प्रदान करते हैं जिससे खिलाड़ी के प्रदर्शन में अंतर आता है। OUT OF FORMके लिए निम्न तत्व जिम्मेदार होते हैं :

  •  उपापचय
  • फिटनेस का अभाव
  • प्रैक्टिस का अभाव
  • मनोवैज्ञानिक प्रभाव
  • प्रतिबद्धता का अभाव
  • मानसिक तनाव
  • भौगोलिक प्रतिकूलता
  • भोजन का प्रभाव
  • शारीरिक कमजोरी
  • सेक्स सम्बन्धी समस्याएं
  • ग्लैमर का प्रभाव
  • अवांछित शारीरिक क्रियाएँ
  • शारीरिक व्याधियाँ
  • दर्शकों का शोर
  • रोशनी का प्रभाव
  • घर की यादें तथा
  • तात्कालिक विचलन इत्यादि।

5. क्या खिलाड़ियों के फॉर्म को मैनेज किया जा सकता है ?

खिलाड़ियों के फॉर्म को मैनेज किया जा सकता है। उपर्लिखित आउट ऑफ़ फॉर्म के जिम्मेदार तत्व में से सामान्य कारकों को छोड़ कर व्यक्तिगत कारणों पर सूक्ष्म अध्ययन तथा विशलेषण करने पर हम पायेंगे कि ये तत्व मैनेज करने योग्य हैं। इन तत्वों में से शारीरिक भौतिक तत्वों को बाह्य रूप से मैनेज किया जा सकता है। मानसिक व्याधियाँ खिलाड़ियों का व्यक्तिगत मामला होता है और इसके समन के लिए मनोवैज्ञानिक अथवा अध्यात्मिक उपचार कारगर सिद्ध हो सकता है। शारीरिक भौतिक तत्वों को बाह्य रूप से मैनेज करने में सामान्य रूप से समान परिणाम प्राप्त होंगे। लेकिन मानसिक व्याधियों के मनोवैज्ञानिक अथवा अध्यात्मिक उपचार से प्राप्त परिणाम अनिश्चित होंगे।

6. क्या यह पता लगाया जा सकता है कि खिलाड़ी किस अवधि में आउट ऑफ़ फॉर्म  में रहेगा ?

खिलाड़ियों का वास्तविक फॉर्म उनके शरीर के अंदर की आन्तरिक क्रियाओं पर आधारित होता है। खिलाड़ियों के शरीर के अन्दर होने वाली उपापचय क्रियाएँ ही उनके फॉर्म के निर्धारक होते हैं। इन अवस्थाओं का सूक्ष्म विशलेषण से यह पता लगाया जा सकता है कि खिलाड़ी किस अवधि में आउट ऑफ़ फॉर्म में रहेगा।

7. क्या यह पता लगाया जा सकता है कि खिलाड़ी कितना मैच ख़राब खेलेगा ?

खिलाड़ियों के शरीर के अन्दर होने वाली उपापचय क्रियाओं का सूक्ष्म विशलेषण से ये पता लगाया जा सकता है कि खिलाड़ी किस अवधि में आउट ऑफ़ फॉर्म में रहेगा। इस अवधि में होने वाले लगभग सभी खेलों में वह असहज महसूस करेगा । इस अवधि में कोई खिलाड़ी आक्रमक खेलने की कोशिश करेगा तो वह नाकाम होगा लेकिन सुरक्षात्मक खेल से वह अपने परफॉरमेंस को कुछ हद तक बचा पाने की स्थिति में हो सकता है।

8. कान्फिडेंस क्या है ?

कान्फिडेंस मानव शरीर की वह सर्वश्रेष्ठ मानसिक-शारीरिक स्थिति होती है जिसमे कोई व्यक्ति, किसी भी कार्य को सम्पूर्णता से सम्पन्न करने की क्षमता का अनुभव करता है। इस समय मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य अपनी चरम ऊँचाइयों पर होती है और स्वास्थ्य के दोनों मूल आधार तत्व तन और मन एक दुसरे के साथ सर्वोच्च समंजन कर  मानव शरीर को सर्वश्रेष्ठ क्षमता से परिपूर्ण करती है। इस समय सम्पन्न किये गए सभी कार्य सर्वश्रेष्ठ परिणाम देने वाली होती है । इस समय कोई भी कठिन कार्य बड़ी सहजता से तथा बिना तनाव के सम्पन्न होते देखा जा सकता है। इस समय अन्मन्यस्कता का कहीं कोई निशान व्यक्ति के चेहरे पर देखने को नहीं मिलता और व्यक्ति जटिल समस्याओं के बीच भी सरलता के साथ सफल होता है।

9. कॉन्फिडेंस कहाँ से आता है ? शरीर के अन्दर से या बाहर से ?

यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि मानव शरीर में कॉन्फिडेंस आखिर कहाँ से आता है ? सत्य तो यह है कि शारीर में कॉन्फिडेंस के आने जाने का कोई रास्ता नहीं है। कॉन्फिडेंस ना ही शरीर के अन्दर आता है और ना ही ये शरीर से बाहर जाता है। वास्तविकता यह है कि कॉन्फिडेंस शरीर के अन्दर ही निर्मित होता है और शरीर के अन्दर ही विलीन हो जाता है। यह शरीर के अन्दर होने वाली कई तरह की प्राकृतिक घटनाओं के परिणाम के रूप में परिलक्षित होती है। हमारे पौराणिक ग्रंथों के अनुसार मानव शरीर पांच तत्वों से बना है। इन्हीं पांच तत्वों के संघठन और विघठन के क्रमिक क्रियाओं के फलस्वरूप शारीरिक स्वास्थ्य में उतार और चढ़ाव होता है। शरीर के स्वास्थ्य में उतार की अवस्था में कॉन्फिडेंस चली जाती है और चढ़ाव की अवस्था में यह शिखर पर आ जाती है। कॉन्फिडेंस की वैज्ञानिक विशलेषण जो भी कहे, पर इनके क्रमिकता से कोई इन्कार नहीं कर सकता। इनके क्रमिकता के आयाम शरीर के आंतरिक स्वास्थ्य अथवा निरोगता और आयु पर निर्भर करता है।

10. शरीर में कॉन्फिडेंस का निवास कहाँ होता है ?

यह एक रोमांचित कर देने वाला प्रश्न है । क्या आपने कभी इस विषय में सोचा है कि आपका कॉन्फिडेंस आपके शरीर के अन्दर किस हिस्से में निवास करता है ? मैं विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि जैसे ही यह प्रश्न आपके समक्ष आयेगा आप अपने अन्दर प्रवेश करेंगे और यह जोर शोर से तलाश करेंगे कि आपका कॉन्फिडेंस किधर है। आप निश्चित रूप से खोजेंगे, अपने अन्दर टटोलेंगे और पायेंगे कि आपके खास-खास हिस्से में कॉन्फिडेंस का निवास है। आप से कभी अगर  मुलाकात होगी तो निश्चित रूप से आपको आपके कॉन्फिडेंस से साक्षात्कार कराया जायेगा, यह आप से मेरा वादा है।

11. कॉन्फिडेंस के उतार-चढ़ाव  के क्या कारण हैं  ?

इस प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने के लिए आप अपनी सहज समझ का इस्तेमाल करेंगे तो सरलता से आपको अपने प्रश्न का जवाब मिल जायेगा। आप दैनिक, मासिक और वार्षिक रूप से प्रकृति में होने वाले बारंबार परिवर्तनों का नियमित अवलोकन एवं विश्लेषण करें, तो आप पायेंगे कि ये प्राकृतिक परिवर्तन एक चक्रीय व्यवस्था के अंतर्गत निरंतर घटित होते रहती है। मानव शरीर भी प्रकृति का एक हिस्सा है और हम भी इस प्राकृतिक परिवर्तन के अधीन है। निरंतर अवलोकन और गहन विश्लेषण के बाद आप पायेंगे कि मानव शरीर में दैनिक और मासिक परिवर्तन की एक प्रक्रिया होती है जिसके कारण हमारे कॉन्फिडेंस के स्तर में भी उतार एवं चढ़ाव होते रहते हैं।

12. क्या कॉन्फिडेंस को मैनेज किया जा सकता है ?

हाँ, कॉन्फिडेंस को मैनेज किया जा सकता है। कॉन्फिडेंस के उतार-चढ़ाव के मुख्य कारणों को नियंत्रित कर के कॉन्फिडेंस को मैनेज किया जा सकता है। इसके लिए इन कारकों का निकट से अवलोकन और निरंतर विश्लेशण की आवश्यकता होती है। कॉन्फिडेंस को नियंत्रित कर किसी भी खेल अथवा कार्य के परफॉरमेंस में औसतन 15 प्रतिशत तक का सुधार प्राप्त किया जा है। इससे परिणाम में काफी अंतर आ सकता है।

13. स्पोर्ट्स में परफॉरमेंस क्या होता है ?

किसी भी कार्य या खेल में किसी व्यक्ति विशेष या खिलाड़ी के द्वारा प्रतिस्पर्धात्मक क्रियाकलाप की परिणति  को ही परफॉरमेंस कहते हैं। परफॉरमेंस के लिए क्रियाकलाप सिर्फ और सिर्फ मानवीय होना एक अनिवार्य शर्त होती है। शारीरिक और मानसिक कार्य दोनों को ही इसके अन्तर्गत शामिल किया जाता है। इसमें गैर परम्परागत चिकित्साकीय या यांत्रिक सहयोग का समावेश बिलकुल ही वर्जित है। व्यक्ति या खिलाड़ी के परफॉरमेंस पर उनके शारीरिक और मानसिक स्वस्थ्य का गहरा प्रभाव होता है, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि यह व्यक्ति के कॉन्फिडेंस लेवल से सीधा जुड़ा रहता है। इसका सीधा सा अर्थ है, यदि कॉन्फिडेंस उच्च होगा तो परफॉरमेंस अच्छा होगा और निम्न होगा तो परफॉरमेंस भी निम्न स्तर का ही होगा। परफॉरमेंस का मानक खेल की अलग-अलग विधाओं में भिन्न तरह की होती है, पर उच्चता को अगर प्रतिशत में देखा जाय तो इसमें काफी कुछ समानता देखा जा सकता है।

14. परफॉरमेंस कब बनता और बिगड़ता है ?

परफॉरमेंस का सीधा-सीधा सम्बन्ध कॉन्फिडेंस और फॉर्म से होता है। कॉन्फिडेंस में उतार-चढ़ाव से फॉर्म में भी उतार-चढ़ाव आता है और इससे परफॉरमेंस भी अनिश्चितता में पड़ जाती है। खेलों में खिलाड़ी के खेलते समय उनके कार्य करने की सटीकता देख कर सहजता से पता चल जाता है कि आमुख खिलाड़ी के कॉन्फिडेंस में कमी है और वह परफॉरमेंस नहीं दे सकता। कॉन्फिडेंस की कमी के कारण एकल या डबल खेल में खिलाड़ियों को असीमित नुकसान होता है तथा क्रिकेट के खेल में भी मुख्य खिलाड़ियों की कॉन्फिडेंस चले जाने से टीम को बहुत हानि होती है क्योंकि खिलाड़ियों को बदलने का अवसर नहीं होता है। फुटबॉल एवं हॉकी इत्यादि खेलों में नुकसान अपेक्षाकृत कम होती है क्योंकि समय रहते कॉन्फिडेंस की कमी वाले खिलाड़ियों को बदला जा सकता है।

15. अच्छा परफॉरमेंस प्राप्त करने के लिए किन चीजों की अवश्यकता होती है ?

अच्छा परफॉरमेंस प्राप्त करने के लिए कम से कम इन छ: चीजों की अवश्यकता बहुत ही जरुरी होता है:

  1. हुनर  2. ताकत   3. कॉन्फिडेंस   4. सटीकता   5. एकाग्रता और 6. धैर्य ।

16. क्या परफॉरमेंस को मैनेज किया जा सकता है ?

परफॉरमेंस को मैनेज किया जा सकता है और यह सत्य है कि इसे मैनेज कर मैच के साथ-साथ टूर्नामेंट को भी जीता जा सकता है। परफॉरमेंस प्राप्त करने के लिए छ: अवश्यक चीजों में से यदि कॉन्फिडेंस को मैनेज कर लिया जाय तो बाकी के पांचों चीजें स्वत: ही पटरी पर आ जाती है। पाँचों को अलग-अलग मैनेज करने की जरूरत नहीं होती।

17. क्या मैनेज्ड परफॉरमेंस से मैच जीता जा सकता है ?

यह सहज सत्य है कि परफॉरमेंस को मैनेज कर मैच के साथ-साथ टूर्नामेंट को भी जीता जा सकता है। यदि कोई खिलाड़ी या टीम के सभी खिलाड़ी मैनेज्ड रूप से अच्छा परफॉर्म करें तो टीम को जीतने से कोई रोक नहीं सकता।

18. क्या टीम का एकीकृत ( Integrated ) फॉर्म प्राप्त किया जा सकता है ?

किसी टीम का एकीकृत ( Integrated )  फॉर्म प्राप्त करना बहुत ही कठिन कार्य है। कोई सरलता से कह सकता है कि यदि किसी एक खिलाड़ी का फॉर्म मैनेज किया जा सकता है तो किसी टीम के सभी खिलाड़ियों को मैनेज करने में क्या कठिनाई है। यह बात सोचने में सहज लग सकता है पर ऐसा नहीं है। टीम के अन्दर बहुत से खिलाड़ी रहते हैं और टीम के लिए सभी खिलाड़ियों को तैयार रहना पड़ता है। यह फैसला करना बहुत ही कठिन है कि क्रिकेट या फुटबॉल के ग्यारह खिलाड़ियों में से किन को फॉर्म में रखा जाय और किसे नहीं। हाँ, कुछ लचीलापन रखते हुए पूरी टीम को मैनेज किया जा सकता और अगर ऐसा होता है तो इस टीम के लिए कोई भी परफॉरमेंस दिखाना कठिन नहीं होगा तथा टीम हर चुनौती को सफलता पूर्वक झेल सकती है।

19. क्या टीम का एकीकृत ( Integrated ) कॉन्फिडेंस लेवल प्राप्त किया जा सकता है ?

किसी टीम का एकीकृत ( Integrated ) कॉन्फिडेंस लेवल प्राप्त किया जा सकता है। कॉन्फिडेंस एक व्यक्तिगत चीज होती है, यह किसी व्यक्ति के अन्दर की चीज है जो शरीर और मन के समंजन कि वास्तविक स्थिति को दर्शाती है। टीम व्यक्तियों के एक समूह से निर्मित होता है अत: उन व्यक्तियों के सम्मिलित कॉन्फिडेंस लेवल का औसत लेवल ही उस टीम का कॉन्फिडेंस लेवल कहलाता है। टीम के अन्दर  एकीकृत  लेवल की परिकल्पना की  जा सकती है। टीम के एकीकृत कॉन्फिडेंस लेवल को व्यक्तिगत कॉन्फिडेंस लेवल के सामुहिकीकरण से प्राप्त किया जा सकता है। टीम के कॉन्फिडेंस लेवल को व्यक्तिगत कॉन्फिडेंस लेवल की उच्चता पर निर्भर रहना पड़ता है।

20. क्या टीम के एकीकृत फॉर्म एवं कॉन्फिडेंस से परफॉरमेंस प्राप्त किया जा सकता है ?

किसी टीम के एकीकृत फॉर्म और एकीकृत कॉन्फिडेंस से अच्छा परफॉरमेंस प्राप्त किया जा सकता है।  किसी टीम का अगर एकीकृत फॉर्म और कॉन्फिडेंस लेवल हासिल कर लिया जाता है तो टीम अत्याधिक मजबूत, संतुलित और संगठित हो जाता है। टीम का हरेक सदस्य अपना सर्वोच्च योगदान देने लगता है और टीम का हरेक विंग बहुत कुशलता के साथ अपना परफॉरमेंस देने लगता है। इस तरह के टीम को जीतने से कौन रोक सकता है। ऐसी टीम अधिकतम मैच जीतते हुए टूर्नामेंट जीतने की क्षमता रखती है।

 

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