Form

FORM ( फॉर्म ) :  खिलाड़ियों के फॉर्म का अध्ययन, मूल्यांकन, वर्गीकरण और निर्धारण किया जा सकता है। खिलाड़ी के फॉर्म को निर्धारित खेल के लिए बनाया जा सकता है। इसे संभाला जा सकता है और इसे लम्बे समय तक बनाये रखा जा सकता है। ये हमारा दावा है। यह कोई अद्भुत चीज नहीं है। सभी खेलों की तरह क्रिकेट में भी फॉर्म के जोखिम को कम किया जा सकता है।

खिलाड़ियों के फॉर्म का अध्ययन, मूल्यांकन, वर्गीकरण और निर्धारण करने के लिए सर्वप्रथम फॉर्म का वर्गीकरण करना अवश्यक हो जाता है। इसके बिना खिलाड़ियों का फॉर्म के आधार पर वर्गीकरण संभव नहीं है।

  1. आउट ऑफ़ फॉर्म ( OUT OF FORM ) : आउट ऑफ़ फॉर्म खिलाड़ी की वह शारीरिक स्थिति होती है जिस स्थिति के होने से खिलाड़ी का हुनर और शारीरिक क्षमता के मध्य ताल-मेल समाप्त हो जाता है। इस शारीरिक अवस्था में शरीर का कोर तापमान इतना नीचे  चला जाता है कि खिलाड़ी के काफी प्रयास के बाद भी खेल के योग्य वांछित तापमान शरीर के अन्दर पैदा नहीं कर पाता है।  इस स्थिति में खिलाड़ी जो करना चाहता है , जैसा खेलना चाहता है उस अनुरूप अपने खेल के द्वारा प्रदर्शन नहीं कर पाता है। इस स्थिति में खिलाड़ी अपने पूर्ण क्षमता का आधा अर्थात 50 % तक ही परफॉर्म  कर सकता है । किसी अंतराष्ट्रीय या प्रथम श्रेणी खिलाड़ी के द्वारा 50 % परफॉरमेंस आउट ऑफ़ फॉर्म की श्रेणी में आता है। इस फॉर्म लेवल में 0 – 50 % तक का परफॉरमेंस मिलता है।
  2. फेयर फॉर्म ( FARE FORM ): फेयर  फॉर्म खिलाड़ी की वह शारीरिक स्थिति होती है जिस स्थिति के होने से खिलाड़ी का हुनर और शारीरिक क्षमता के मध्य ताल-मेल  स्थापित होने में समय लगता है। इस शारीरिक अवस्था में शरीर का कोर तापमान अपने निचले ही स्थिति में रहता  है । खिलाड़ी के काफी प्रयास के बाद भी खेल के योग्य समुचित वांछित तापमान शरीर के अन्दर पैदा नहीं कर पाता है। इस अवस्था में खिलाड़ी धीरज रखते हुए अपने को खेल में बनाये रख सकता है । खिलाड़ी के जरा-सा भी अधीरता दिखलाने पर वह खेल में गलतियाँ कर बैठता है और उसे बाहर जाना पड़ सकता है। इस अवस्था में खिलाड़ी अपने क्षमता का 50-60% तक का प्रदर्शन दिखला सकता है।

  3. गुड फॉर्म ( GOOD FORM ): गुड फॉर्म खिलाड़ी की वह शारीरिक स्थिति होती है जिस स्थिति के होने से खिलाड़ी का हुनर और शारीरिक क्षमता के मध्य ताल-मेल  स्थापित होने में  कम समय लगता है। इस शारीरिक अवस्था में शरीर का कोर तापमान अपने मध्य से उपर की  स्थिति में रहता  है । खिलाड़ी के समुचित  प्रयास से ही खेल के योग्य  वांछित तापमान शरीर के अन्दर पैदा हो जाता  है। इस अवस्था में  खिलाड़ी के द्वारा खेल के दौरान गलतियाँ करने की कम संभावनाएँ रहती हैं। खेल में धीरज रखते हुए ये  खिलाड़ी लम्बे समय तक खेल में बने रह सकता है। इस अवस्था में खिलाड़ी अपने क्षमता का 60-70% तक का प्रदर्शन दिखला सकता है।

  4. एक्सीलेंट फॉर्म ( EXCELLENT FORM ) : एक्सीलेंट फॉर्म खिलाड़ी की वह शारीरिक स्थिति होती है जिस स्थिति के होने से खिलाड़ी का हुनर और शारीरिक क्षमता के मध्य ताल-मेल  स्थापित होने में  बहुत कम समय लगता है। इस शारीरिक अवस्था में शरीर का कोर तापमान अपने उपरी  स्थिति में रहता  है । खिलाड़ी के कम  प्रयास से ही खेल के योग्य  वांछित तापमान शरीर के अन्दर पैदा हो जाता  है। इस अवस्था में  खिलाड़ी के द्वारा खेल के दौरान गलतियाँ करने की  संभावनाएँ बहुत कम रहती हैं। खेल में धीरज रखते हुए ये  खिलाड़ी  खेल के अंत तक बने रह सकता है। इस अवस्था में खिलाड़ी अपने क्षमता का 70-80% तक का प्रदर्शन दिखला सकता है।

  5. डायनामिक फॉर्म ( DYNAMIC FORM ): डायनामिक फॉर्म खिलाड़ी की वह शारीरिक स्थिति होती है जिस स्थिति के होने से खिलाड़ी का हुनर और शारीरिक क्षमता के मध्य ताल-मेल  स्थापित होने में  समय ही नहीं लगता है। इस शारीरिक अवस्था में शरीर का कोर तापमान अपने चरम  स्थिति में रहता  है । खिलाड़ी के अन्दर स्वत: ही खेल के योग्य  वांछित तापमान  पैदा हो जाता  है। इस अवस्था में  खिलाड़ी के द्वारा खेल के दौरान गलतियाँ करने की  संभावनाएँ नगण्य रहती हैं। इस अवस्था में खिलाड़ी अपने-आपको काबू में नहीं रख सकता और लगातार उच्चतम प्रयास जारी रखता है। इस अवस्था में खिलाड़ी अपने क्षमता का 80-90% तक का प्रदर्शन दिखला सकता है।

  6. गैगंटिक फॉर्म ( GIGANTIC FORM ): गैगंटिक फॉर्म डायनामिक फॉर्म  का ही उच्चतम रूप है । जिसमें खिलाड़ी  अपने-आपको काबू में नहीं रख सकता और लगातार उच्चतम प्रयास जारी रखता है। डायनामिक फॉर्म के खिलाड़ी का परफॉरमेंस  विपक्षी खिलाड़ी के कमजोरी या घबड़ाहट में की गयी गलती से  गैगंटिक परफॉरमेंस में परिवर्तित हो जाता है और खिलाड़ी का गैगंटिक फॉर्म उभर कर आता हैं । यही वह फॉर्म है जिस फॉर्म में कोई खिलाड़ी अपने उच्चतम प्रतिमानों को स्थापित कर सकता है और इस प्रदर्शन के करीब अपनी जिंदगी में कभी-कभी ही आ पाता है। यह खिलाड़ी के उच्चतम प्रदर्शन का मापदंड बन जाता है और जिंदगी भर के लिए यादगार प्रदर्शन बनता है।  इस अवस्था में खिलाड़ी अपने क्षमता का 90-100% तक का प्रदर्शन दिखला सकता है।

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