Classification

FORM ( फॉर्म ) :  खिलाड़ियों के फॉर्म का अध्ययन, मूल्यांकन, वर्गीकरण और निर्धारण किया जा सकता है। खिलाड़ी के फॉर्म को पूर्व निर्धारित खेल के लिए तैयार किया जा सकता है। इसे संभाला जा सकता है और इसे लम्बे समय तक बनाये रखा जा सकता है। ये हमारा दावा है। यह कोई अद्भुत चीज नहीं है। सभी खेलों की तरह क्रिकेट में भी फॉर्म के जोखिम को कम किया जा सकता है।

CONFIDENCE ( कॉन्फिडेंस ) : कॉन्फिडेंस मानव शरीर के अन्दर का एक अहसास है, जो किसी भी कार्य को सपन्न करने की दैहिक शक्ति का सटीक आकलन करता है। यद्यपि यह अनेकों तत्वों पर निर्भर करता है, लेकिन वस्तुत: ये तन और मन के मिलन बिंदु के अधिकेन्द्र की सटीकता पर निर्भर करता है। तन और मन के समंजन का स्तर जितना उच्च होगा कोई खिलाड़ी उतना ही सटीकता के साथ अपने हुनर को उपलब्धियों में बदल सकेगा।

ATTITUDE ( तत्परता ) : तत्परता दो तरह की होती है, पहला मानसिक और दूसरा शारीरिक। ये दोनों तरह की तत्परता मनुष्य में आचरण के माध्यम से परिलक्षित होता है। लेकिन चूँकि यहाँ हम स्पोर्ट्स की बात कर रहे हैं अत: हम यहाँ खेल सम्बन्धी तत्परता ( Sporting Attitude ) के बारे में ही बात करेंगे। बौधिक खेलों के खिलाड़ी यदि तन और मन से तंदुरुस्त रहता है तो उनका मन हमेशा खेल के क्रिया-कलापों के आस-पास रहता है। शारीरिक खेलों के खिलाड़ी का तन हमेशा उन क्रियाओं को दुहराता है जिसके करने से उनका मन सर्वोत्तम परिणाम हासिल कर सकता है। अर्थात खेलों में जिन अंगों का इस्तेमाल होते है उन अंगों को मजबूत बनाया जाय तो शरीर में तत्परता ( Attitude ) अपने आप आ जाता है। हम अपने मिश्रणों के माध्यम से उन अंगों पर अधिक से अधिक ऑक्सीजन पहूँचा कर तत्परता बनाने और बढ़ाने वाली ताकत देते हैं।

ACCURACY ( सटीकता ) : कोई भी खेल में खेल रहे खिलाड़ी की खेलने की सटीकता दर्शक लोग सहजता से देख और पहचान लेते हैं। फुटबॉल और हॉकी में पास सटीक नहीं होते, क्रिकेट में फील्डर का थ्रो सही नहीं होता, बॉलर अपना दिशा भटक जाता है, और बैट्समेन बीट होते रहता है। इसका कारण सिर्फ और सिर्फ शरीर का तापमान होता है जो कि उपापचय ( Metabolism ) के माध्यम से नियंत्रित होता है। खिलाड़ी जितना जल्दी अपना वांछित तापमान प्राप्त करेगा उतना ही जल्दी वह अपना वास्तविक लय प्राप्त करेगा और अच्छा खेलेगा। क्रिकेट के 60 प्रतिशत मैचों में 75 प्रतिशत बैट्समेन 0 और 20 के बीच के स्कोर में आउट होते हैं क्योंकि वे जल्दी से वांछित तापमान प्राप्त नहीं कर पाते हैं।

PERFORMANCE ( परफॉरमेंस ) : परफॉरमेंस एक स्पॉट इवेंट होता है। इसके लिए पूर्व तैयारी तो की जा सकती है पर सोचे हुए के अनुसार शायद ही होता है। खेलने के दरम्यान तरह-तरह का दबाव रहता है, इस पर यदि भरोसे के खिलाड़ियों का परफॉरमेंस बिगड़ता है तो बाकी सबके परफॉरमेंस पर विपरीत असर पड़ता है। इस तरह के अनहोनी से बचने के लिए सभी खिलाड़ियों को समयपूर्व ही व्यवस्थित कर लेना चाहिए। इसके लिए उनके confidence, Accuracy और Attitude को पहले से ही रेगुलेट कर लेना अच्छा होता है। अगर इस काम को पहले कर लिया जाय तो हर खिलाड़ी से अच्छा परफॉरमेंस प्राप्त किया जा सकता है।

REFORMER ( रिफॉर्मर ) : हमारे द्वारा प्रस्तुत किया जाने वाला रिफॉर्मर पूर्णत: वनस्पति पर आधारित है। इसमें पौधों का जड़, तना, छाल, पत्तियाँ, फल और बीजों का मिश्रण है। इन पेड़-पौधों को परमेश्वर ने बनाया है और इसमें किसी तरह की त्रुटियाँ नहीं हो सकती है। इनके गुणों को हमारे पूर्वजों ने पहचाना और सीखा और हमने उनका अनुकरण किया। हमने सिर्फ इसके जड़, तना, छाल, पत्तियाँ, फल और बीजों का चूर्ण बनाकर तथा उचित मात्रा में मिलाकर खिलाड़ियों के खाने के लायक बनाया है। इस मिश्रण में किसी तरह का रसायन, जीव-जन्तुओं अथवा कीड़े-मकोड़े का अंश नहीं है। अर्थात किसी के भी धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता के लिए हानिकर नहीं है।

कोई भी दवा लेते वक्त खिलाड़ियों को चार चीजों पर ध्यान देना चाहिए :

  1. दवा डोपिंग से सुरक्षित हो।
  2. दवा अतिकामुकता पैदा करने वाला न हो।
  3. दवा बांझपन से सुरक्षित हो।
  4. दवा नपुंसकत्ता से सुरक्षित हो।

BASIC REFORMER ( बेसिक रिफॉर्मर ) : बेसिक रिफॉर्मर से कोर्स की शुरुआत होगी और ये समयबद्ध रूप से चलेगा। इसका कार्य शरीर के पाचन-तंत्र  की कमजोरियों को दुरुस्त करना है। शरीर को बलशाली बनाने के लिए मानव अन्न, जल और वायु ग्रहण करता है इससे उन्हें ताकत आती है, और शरीर को  निरोग रखने के लिए मल, मूत्र इत्यादि के माध्यम से व्यर्थ पदार्थ को त्यागता है। इसमें जरा सी भी गड़बड़ी होने पर स्वस्थ्य मानव भी रोगी हो जाता है। बेसिक रिफॉर्मर खिलाड़ियों के पाचन-तंत्र को मजबूत बनाता है  तथा उच्च कोटि का स्वास्थ्य प्रदान करता है।

SMOOTH REFORMER ( स्मूथ रिफॉर्मर ) : यह कोर्स के दूसरे चरण में आता है। जानकारी के लिए उद्धृत किया जा रहा है कि मानव शरीर में कुछ ऐसे भी व्याधियाँ व्याप्त रहती है जो शारीरिक रूप से ज्यादा तंग नहीं करती है, पर जीवन के समरसता पर खलल डालती है। इस तरह की व्याधियाँ प्राय: हर युवाओं में पाया जाता है। इस तरह की व्याधियाँ मन को आशंकित कर देती है। व्यक्ति चाह कर भी उस समस्या को मन से हटा नहीं सकता और वह हमेशा बेचैन रहता है। ऐसा व्यक्ति जितना भी स्वस्थ्य हो पर वह अन्दर ही अन्दर शंका और आशंकाओं से पीड़ित रहता है। ऐसे में वह कोई भी कार्य में एकाग्रता ला नहीं सकता और ना ही किसी काम को सम्पूर्णता से कर पाता हैस्मूथ रिफॉर्मर तन और मन को Smooth बनाता है।

 

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